अंदाज़-ए-शायराना

चंचल मन की एक खूबी यह है, की उसमे शर्म की गुंजाईश ज़रा कम ही रहती हैं. तो फिर क्या था! हम भी मस्तमौला बन अनाप शनाप बकते गए, और उसे लोग शेरो-शायरी कहते गए! अब आपकी वारी हैं परेशान होने की! पढ़ ही लीजिये कुछ लब्ज़ गम और खुशियों की…….

Here you go…

दुश्मन से मत डर ए बन्दे
उसे खोने का गम नहीं
खौफ तो उस वीरान ज़िन्दगी से है
जो दोस्त खोने से होता है

Separator

क़हक़हे गूंज रही थी ज़िन्दगी की
लेकिन, मौत का ठहाका बुलंद निकला
जीनेवाले यूँ ही मूर्झा गए
जैसे जीते जी जनाजे का बुलावा हैं

Separator

मेरे दिल की दर्द दबी ही रही
मुझे बस रब ने तड़पते देखा हैं
हम तन्हाईं में बैठे रोते रहे
लोगों ने बस महफ़िल में हँसते देखा हैSeparator

 

 

 

तमन्नाओं का क्या, वो तो बस टपक पड़ते हैं
उन्हें पूरी करने का बोझ तो अहसानमंद ही उठता हैं

Separator

देखीं हैं दरार मैंने आज आईने में
पता नहीं शीशा टुटा या मैं
टुटा ही खुश हूँ, बिखरा तो नहीं
ज़िन्दगी के सहारे, जुड़ भी जाऊंगा

Separator

 

 

 

खुशनसीब हैं वो, जिसने गुलाब को हँसते देखा
उन्हें दुःख खिलते हुए दिखा
सुख की हसी तो सब हँसते हैं
मुकम्मल वही, जिसने गम में हंसना सीखा

Separator

बुरी आदत से समझौता फिर भी हैं मुमकिन
मगर बुरी नियत को झेल न सके
महफ़िल की उम्र अगर हो भी कमसिन
दोस्तों के जज्बातों से खेल न सके

Separator

 

 

 

अंधेर घर में कहाँ, दिल में बसता हैं
दिया का उजाला भी तो, मन में सजता हैं
फ़रिश्तें तो सिर्फ राहगीर का किरदार निभाएं
अच्छाई का दिया लिए, अँधेरा दूर भगाएं

Separator

गम की गहराईयों से तो ख़ुशी की उचाइयां बेहतर
कम से कम दिख तो जाया करती हैं!
गहराईयों को नापते नापते पैमाना खो बैठे
लेकिन खुशियों की चढ़ाई चढ़ते थके नहीं

And some more

Separator

 

 

 

अचरज में हमने खुदा से पूछ ही डाला
बाकि फरिस्तों को कैद क्यों कर रखा?
ज़िल्लत अब भी हैं इस दुनिया में
बाकियों को भेजो, तांकि बन पाए सखा

Separator

घबराहट की आहट तो तब सुनाई देती है
जब तपती धुप में बंदा वीरान हो
दोस्ती के सुहानी छावों का जो आसरा मिल जाये
दर्द की क्या मज़ाल की वोह सुकून छीन ले

Separator

 

 

 

सराहने वाले रहे सर आँखों पर
क्या मजाल की कोई आंच आए!
दोस्तों से कुर्बत जन्नत से कम नहीं
इस नाचीज़ को भ्रम ही भाये

Separator

नाचिज़ों पे रहम, इंसान का करम
वाहवाही में बहना, मूर्खों का धरम
कोयला तो कोयला ही हैं, भष्म हो जाये
कांच का टुकड़ा हूँ, मुझपे करे रहमSeparator

 

 

 

फरिस्तों की बोलती बन्ध करना, सराहनीय नहीं
उजाले को ढकने की कोशिश नाकाम ही होगी
ए फरिस्ते, ए मेरे यार, खुली रखना मन की द्वार
इस नाचीज़ को उजाले की बहुत ज़रुरत हैं

Separator

मिज़ाज़ का क्या है, अब शरीफ तो तब उखरि
शायराना फन के काबिल हम कहाँ
बस लिख डालते हैं सोच की दास्ताँ
आप के तारीफों से मिलती हैं जहाँ

Separator

 

 

 

वाह वाहों की कशिश अक्सर कोशिश में बसती है
कामयाबी तो सिर्फ हांथी के दांत हैं
खाने के और, दिखाने के कुछ और

Separator

मौसम की शमा, हवा के झोंको से बँधती है
वक़्त की मौसिक़ी, दोस्तों के आवाज़ में गूंजती है
कुछ वक़्त हमे भी नसीब हो दोस्त
तांकि मैसीकी के झोंको का लुत्फ़ हम भी उठाएं

Separator

 

 

 

शमा ऐ महफ़िल बन शिकार पर निकले
कई घायल हुए, तो कई कातिल निकले
आदत से मजबूर जब घर को चले
घर का दायरा, सबसे महफूज़ निकलेSeparator

कामयाबी की आग़ाज़, उम्मीदों ने की
किसी का उड़ान था, तो किसी की गोताखोरी
हमने तो इंतज़ार में वक़्त जाया किया
कदरदान ही रह गए, वो भी चोरी चोरी

And Yet more

Separator

 

 

 

हस्ती कदर के मौताज नहीं
वो अपने धुन में रहते हैं
मुझ नाचीज़ की औकात नहीं
इसलिए मुझे चींटी कहते हैं

Separator

वक़्त का तक़ाज़ा है
दिवस दिवस खेले
कभी माँ को खिंच लाये
कभी प्यार को झेले

 

मौताज नहीं यार कोई दिवस का
हर लम्हे में वह छाये
जीवन का कोई दिवस नहीं होता
यारी हरदम लहराए

Separator

 

 

 

बेहतरी की उम्मीद में, बदतर हुयें अंदाज़
अमन के गुंजाईश ने, घोंट दी आवाज़
अब तो इंतज़ार हैं उस फरिस्ते की
खौफ हटाकर जो बनें जांबाज़

Separator

यारों की यारी, मुर्दों में जान डाल दे
हौसला ये प्यारी, इंसान में पंख डाल दे
शायरी के दो लब्ज़ क्या चीज़ हैं
नाकाम के सर, कामयाबी का ताज़ डाल दे

Separator

 

 

 

रिश्तों ने ग़ज़ल छेड़ी, हम कायल हो गए
यारों के जज्बातों से, हम घायल हो गए
इन घावों की दवा न तलाशना मेरे दोस्त
यह तो मेरे मन-मंदिर के छनकते पायल हो गए

Separator

ज़िन्दगी ने मुस्कुराते हुए कहा
“उस्ताद तो हम भी न थे
तेरी कोशिशों से तो बस अभी मेरी तालीम मुकम्मल हुई”

Separator

 

 

 

ज़िन्दगी भी अनोखी है, क्या क्या गुल खिलाती हैं
कभी मंज़िल पड़ाव, और कभी पड़ाव मंज़िल बन जाती है

Separator

हुनर को तराशा आपकी पारखी निगाहों ने
इन लब्ज़ों को सजाया यकीनी जज्बातों ने
टूटे फूटे बोलों की क्या मज़ाल होती
अगर न की होती इज़हार, आप के जुबानों ने

Separator

 

Back to Home

2 thoughts on “अंदाज़-ए-शायराना

  1. Is there anything left? Just amazing… I am speechless… Behind every creation of yours there’s a ray of hope…. Strong mind and spontaneity which I love… Which gives positivity….

Leave a Reply